Retirement Age – भारत में सरकारी सेवाओं से जुड़े लाखों कर्मचारी और अधिकारी वर्तमान में एक बेहद चर्चित खबर पर अपनी नज़रें टिकाए हुए हैं। केंद्र सरकार की ओर से एक ऐसा प्रस्ताव सामने रखा गया है जो उनके भविष्य को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकता है। इस प्रस्ताव के अनुसार केंद्रीय सेवाओं में कार्यरत कर्मियों की सेवानिवृत्ति की उम्र को साठ वर्ष से आगे बढ़ाकर बासठ वर्ष तक ले जाने की संभावना जताई जा रही है। यदि यह विचार वास्तविकता का रूप लेता है तो यह देश की प्रशासनिक व्यवस्था में एक बड़े परिवर्तन की शुरुआत होगी।
बदलाव की जरूरत कहाँ से आई
आज के युग में चिकित्सा विज्ञान और स्वास्थ्य सेवाओं में आई प्रगति के चलते मनुष्य की औसत आयु में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पहले के समय में साठ वर्ष की आयु को वृद्धावस्था की शुरुआत माना जाता था, लेकिन अब इस उम्र में भी अधिकांश लोग शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह सक्षम होते हैं। एक अनुभवी सरकारी अधिकारी जिसने दशकों तक विभिन्न विभागों में काम किया हो, उसका ज्ञान और कार्यकुशलता एक बड़ी राष्ट्रीय संपदा होती है। ऐसे में उन्हें सेवानिवृत्त कर देने से प्रशासन को उनके अनुभव से वंचित होना पड़ता है, जो किसी भी दृष्टि से उचित नहीं लगता।
अनुभव का महत्व और प्रशासनिक दक्षता
किसी भी सरकारी विभाग की कार्यप्रणाली केवल नियमों और कानूनों पर नहीं, बल्कि उसमें काम करने वाले लोगों के व्यावहारिक अनुभव पर भी टिकी होती है। एक वरिष्ठ अधिकारी को पता होता है कि किसी जटिल परिस्थिति में कैसे निर्णय लिया जाए, किस मामले को किस प्राथमिकता से निपटाया जाए और नीति निर्माण में किन बातों का ध्यान रखा जाए। ये सब बातें किसी पुस्तक में नहीं लिखी होतीं बल्कि वर्षों की मेहनत और अनुभव से सीखी जाती हैं। इसीलिए सरकार का मानना है कि ऐसे अनुभवी कर्मियों की सेवाएं दो अतिरिक्त वर्षों के लिए जारी रखना प्रशासन के हित में होगा।
किन कर्मचारियों को मिलेगा इसका फायदा
इस प्रस्तावित नियम का दायरा व्यापक होने की संभावना है और यह केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, सरकारी विभागों, आयोगों और स्वायत्त संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारियों तक फैल सकता है। चाहे कोई प्रशासनिक पद पर हो, तकनीकी विभाग में काम करता हो या किसी अन्य सेवा श्रेणी से जुड़ा हो, इस संशोधन का लाभ सभी को समान रूप से मिल सकता है। जो कर्मचारी वर्तमान में साठ वर्ष की उम्र के करीब हैं, उनके लिए यह खबर किसी राहत से कम नहीं होगी। इस नियम के लागू होने के बाद उन्हें दो वर्ष और नियमित वेतन, पेंशन योगदान और अन्य सेवा लाभ प्राप्त होते रहेंगे।
आर्थिक दृष्टि से कर्मचारियों को लाभ
किसी भी कर्मचारी के लिए सेवानिवृत्ति का समय आर्थिक रूप से एक संवेदनशील दौर होता है। इस समय तक बच्चों की शिक्षा, घर का निर्माण, विवाह जैसी जिम्मेदारियाँ अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई होतीं और ऊपर से नियमित आय का बंद होना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। यदि सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ती है तो कर्मचारियों को अपनी वित्तीय स्थिति को और बेहतर तरीके से व्यवस्थित करने का समय मिलेगा। जो कर्मी किसी प्रकार के ऋण में हैं या जिनकी पारिवारिक जिम्मेदारियाँ अभी बाकी हैं, उन्हें दो अतिरिक्त वर्षों की नियमित आय से बहुत राहत मिल सकती है।
युवा पीढ़ी पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंता
हर बड़े निर्णय के साथ कुछ आशंकाएँ भी जुड़ी होती हैं और इस प्रस्ताव के साथ भी ऐसा ही है। देश में बेरोज़गारी पहले से एक गंभीर समस्या है और युवा पीढ़ी सरकारी नौकरियों के लिए कड़ी मेहनत करती है। जब मौजूदा कर्मचारी दो साल और सेवा में बने रहेंगे तो स्वाभाविक रूप से उतने पद खाली नहीं होंगे और नई भर्तियों की संख्या प्रभावित हो सकती है। यह एक वास्तविक चिंता है जिस पर नीति निर्माताओं को गंभीरता से विचार करना होगा।
सरकार का पक्ष और भविष्य की योजना
सरकार की ओर से इस चिंता को पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है लेकिन यह भी स्पष्ट किया गया है कि देश में प्रशासनिक विस्तार और नई सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए नए पदों की भी आवश्यकता लगातार बनी रहती है। सरकार का तर्क है कि अनुभवी और युवा कर्मचारियों का संतुलन ही किसी भी विभाग को बेहतर तरीके से चलाने की कुंजी है। दोनों के बीच तालमेल बनाए रखना एक कुशल प्रशासन की पहचान होती है। इसलिए सरकार इस प्रस्ताव को केवल कर्मचारियों के हित में नहीं बल्कि समग्र शासन सुधार की दिशा में एक संतुलित कदम के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
राज्य सरकारों के लिए भी संदेश
केंद्र सरकार ने इस विषय में राज्य सरकारों को भी एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है कि वे अपने स्तर पर इस विचार को अपनाने पर मंथन करें। देश के विभिन्न राज्यों में अभी सेवानिवृत्ति की आयु अलग-अलग है जिसके कारण कर्मचारियों के बीच असमानता की भावना पैदा होती है। यदि केंद्र और राज्य दोनों एक समान नीति को अपनाएँ तो पूरे देश में सरकारी सेवाओं में एकरूपता स्थापित होगी। इससे न केवल कर्मचारियों को न्याय मिलेगा बल्कि प्रशासनिक ढाँचे में भी एक स्वस्थ एकता का भाव उत्पन्न होगा।
सामाजिक जीवन पर सकारात्मक असर
जब कोई अनुभवी अधिकारी दो साल और सेवा में रहता है तो वह केवल अपने विभाग को ही नहीं बल्कि उसके अधीन काम करने वाले नए और जूनियर कर्मचारियों को भी लाभ पहुँचाता है। वरिष्ठ कर्मचारी युवा साथियों को सही मार्गदर्शन देते हैं, उन्हें व्यावहारिक ज्ञान सिखाते हैं और कार्य संस्कृति को बेहतर बनाने में सहयोग करते हैं। इस प्रकार का ज्ञान हस्तांतरण किसी प्रशिक्षण केंद्र में नहीं मिलता बल्कि यह दैनिक कार्य के दौरान स्वाभाविक रूप से होता है। इससे विभागों की कार्यक्षमता बढ़ती है और सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होता है।
सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु को साठ से बासठ वर्ष करने का प्रस्ताव एक बहुआयामी और विचारपूर्ण पहल है जिसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। यह कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा देगा, देश के प्रशासन को अनुभव का लाभ मिलेगा और शासन व्यवस्था में स्थिरता आएगी। हालाँकि इसके साथ जुड़ी युवा रोजगार की चिंताओं को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए और सरकार को दोनों पक्षों में उचित संतुलन बनाए रखना होगा। अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद ही इस प्रस्ताव की पूरी रूपरेखा स्पष्ट होगी, लेकिन अभी के लिए यह लाखों कर्मचारियों के लिए एक उम्मीद भरी खबर जरूर है।

